नारी है धरती की कोमल कली, स्नेह से सींचे हर जीवन गली। उसकी हँसी में बसी है बहार, उसके आँसू में छिपा संसार। बेटी बने तो आँगन महकाती, बहन बने तो राखी सजाती। पत्नी बने तो अर्धांगिनी कहलाती, माँ बने तो ईश्वर भी झुक जाती। उसकी ममता से जगत पले, उसके त्याग से दीप जले। वो खुद भूखी रहकर भी, अपनों की थाली भर देती। संघर्षों से जब टकराती है, तो दुर्गा का रूप निभाती है। वो आँसुओं में भी शक्ति छिपाती, हिम्मत से हर दुख हर जाती। नारी है धैर्य, नारी है साहस, नारी से ही सजता हर आभास। उसके बिना अधूरा जहान, वो ही जीवन का पहला वरदान। कभी सीता की मर्यादा दिखाती, कभी झाँसी की रानी बन जाती। उसकी चुप्पी को कमजोरी न समझो, उसकी नज़रें ही तलवार हैं मानो। जो सम्मान न दे नारी को, वो खो देता है सारी खुशी को। नारी है प्रेम, नारी है शक्ति, नारी से ही दुनिया है भक्ति। जहाँ उसका होता है मान, वहीं खिलता है सच्चा जहान। श्वेता अग्रवाल ✍️🤗🥰❤️
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