शिक्षा का मेहत्व

अज्ञान की रातों में दीपक जलाती है शिक्षा, टूटे हुए सपनों को पंख लगाती है शिक्षा। वह केवल अक्षरों का संगम नहीं, यह तो आत्मा को दिशा देने वाली धारा है। जहाँ अंधकार बसा हो मन में, वहाँ ज्ञान का पहला उजाला ही सहारा है। गरीबी की जंजीरों को तोड़ती है शिक्षा, असमानता की दीवारों को मोड़ती है शिक्षा। यह राजा और भिखारी के बीच की दूरी मिटा देती है, मनुष्य को उसके असली मूल्य से मिला देती है। शिक्षा सिर्फ रोज़गार का साधन नहीं, यह तो विचारों का विस्तार है, यह सिखाती है कि इंसान का सबसे बड़ा धन उसका चरित्र और संस्कार है। जहाँ शिक्षा है, वहाँ प्रगति का पथ है, जहाँ शिक्षा है, वहाँ मानवता का सत्य है। यह मिट्टी को सोना बना सकती है, यह हर हृदय में दीपक जला सकती है। इसलिए हे मानव, ज्ञान की ओर बढ़, अज्ञान के पर्दे को सदा फाड़। क्योंकि शिक्षा ही जीवन का सच्चा गहना है, जो पहन ले, वही इंसान सुगंधित चंदन सा बहना है। Anu✍🏻

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कविता

लेखक : Anu
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