गरीबी और कठिनाइयों से जूझती सरला ने अपने बेटे रवि की पढ़ाई और भविष्य के लिए अपना सबकुछ कुर्बान कर दिया। भूख, थकान और समाज के तानों के बीच भी उसने कभी हार नहीं मानी। उसका त्याग अंतत रंग लाया, और रवि की सफलता माँ के प्रेम का सबसे बड़ा प्रमाण बन गई।
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