आज फिर से वो चीख सुनाई दे रही थी , जो बरसों से दबा दी गई थी ... , आज फिर से वो सिसकियां ले रही थी , जिसे बंद दरवाजे के पीछे कोई सुन न सके ,
1. दबी हुई सिसकियां 19 | 15 | 18 | 5 | | 12-09-2025 |
© Copyright 2023 All Rights Reserved