ज़िंदगी के हर रिश्ते में कभी न कभी फासले आते हैं। ये फासले.....कभी वक्त के कारण, तो कभी हालात के कारण और कभी दिल की अनकही बातों के कारण ...... इंसान को गहरी सोच में डाल देते हैं। कभी ये दूरियां दर्द देती हैं, तो कभी सब्र सिखाती हैं और कभी मोहब्बत की असली क़ीमत समझा जाती हैं। फासले महज़ मीलों की दूरी नहीं होते, बल्कि रूह और अहसास की कसौटी बन जाते हैं। इन्हीं दूरियों में छुपा होता है वफ़ा का इम्तिहान, मोहब्बत का रहस्य और इंसान की हक़ीक़त। यही सोच इस कविता की रूह है। “ये दूरियां” महज़ जुदाई की दास्तां नहीं, बल्कि एक दार्शनिक सफ़र है....जहां मोहब्बत, सब्र और उम्मीद के बीच इंसान खुद को पहचानने लगता है।
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