यह कहानी गौरी की है, जो मजबूरी में कोठे की दीवारों में कैद हो जाती है। दर्द, शोषण और बेबसी के बीच उसकी आँखों में आज़ादी के सपने पलते हैं। हिम्मत और संघर्ष के सहारे वह जंजीरें तोड़ती है, और उसकी दास्तान हर क़ैद औरत की आवाज़ बन जाती है।
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