कांच जैसी दोस्ती

काँच जैसी दोस्ती नाज़ुक भी है और पारदर्शी भी, ये टूटे तो चुभन देती है, निभे तो ज़िंदगी चमका देती है।

16 Views
Time : 1 Min

All Right Reserved
दैनिक प्रतियोगिता

: विजय सांगा
img