राजा विक्रम सिंह अपने अहंकार और दरबारियों की चापलूसी में अंधा हो जाता है। सच्चाई अनसुनी कर वह राज्य को संकट में धकेल देता है। शत्रु आक्रमण करता है, सैनिक टूट जाते हैं और चापलूस भाग खड़े होते हैं। अंततः राजा समझता है कि अहंकार और चापलूसी विनाश का मार्ग हैं।
© Copyright 2023 All Rights Reserved