साथ चलते-चलते काँटे भी बो दिए गए, अपनों के ही लफ़्ज़ ज़हर जैसे हो गए। ममता की जगह आई तानों की चोट, सपनों की जगह बस रह गया खामोशी का बोझ।
1. रिश्तो की चुभन 22 | 14 | 19 | 5 | | 29-08-2025 |
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