“अपराधी अपनी मां का” एक करुणा दायक कथा है, जिसमें पत्नी के छल से बेटा अपनी माँ से दूर हो जाता है। माँ त्याग और तन्हाई में जीती है, पर बेटे को दोषी नहीं ठहराती। सच्चाई माँ की मौत के बाद सामने आती है, और बेटा अपराधबोध में जीवन भर प्रायश्चित करता है।
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