सन्नाटा भी बोल उठता है, जब शब्द थम से जाते हैं, खामोशी में कितने किस्से, अपने राज़ छुपाते हैं। रात के गहरे आँगन में, चाँद जब ठहर जाता है, सन्नाटा तब धीमे धीमे, मन का हाल सुनाता है। पत्तों की सरसराहट में, बीते लम्हे झलकते हैं, टूटे हुए सपनों के चेहरे, खामोशी में चमकते हैं।
© Copyright 2023 All Rights Reserved