गणेशा

लफ़्ज़ों के हर मोड़ पे बप्पा का सहारा है, कलम को संभालने वाला वही दुबारा है। विघ्न हरण कर देते हैं जब थक जाती कहानी, गणेशा की मुस्कान में ही सुकून हमारा है। दिल से निकले हर शब्द बने दुआओं का सागर, उनके आशीष से ही तो रौशन ये किनारा है। मैं लिखूं या रुक जाऊं, फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि मेरे लफ़्ज़ों में बस उनका ही इशारा है।🙏

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दैनिक प्रतियोगिता

: Sukoon Bazzad ✍️
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