कभी हँसी की लकीरें खींची थीं उसमें, कभी आंसुओं की बूँदें गिर पड़ीं। कभी अरमानों ने सजाया था उसे, कभी शिकायतों ने भी जगह गढ़ी।
1. वो चिट्ठी जो भेजी न गई 26 | 19 | 24 | 5 | | 26-08-2025 |
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