"कभी-कभी ज़िंदगी हमें ऐसे मोड़ पर खड़ा कर देती है, जहाँ हमें अपनी मर्ज़ी और दूसरों की उम्मीदों में से चुनना पड़ता है। ‘स्वैच्छिक’ अमृता की वही कहानी है—जहाँ फैसले आसान नहीं, लेकिन आत्म-संतोष की कीमत सबसे बड़ी होती है। क्योंकि असली जीत तब है, जब रास्ता आपका हो और मंज़िल भी।"
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