किन्नर का श्राप

एक गांव की गलियों में छिपा है किन्नर का अनसुना श्राप – जो पीढ़ियों से खून और खामोशी में जिंदा है। सवाल ये है कि कौन उस अंधेरे सच को जानकर भी ज़िंदा लौट पाएगा?

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: विजय सांगा
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