#Justice_for_Manisha

धरा की गोदी लहूलुहान हुई, इंसानियत फिर शर्मसार हुई। मनीषा की चीखें गूंज उठीं, न्याय की दहलीज़ फिर से सन्नाटे में डूबी..✍️ #Justice_for_Manisha

31 Views
Time : 1 Min

All Right Reserved
कविता

: Sukoon Bazzad ✍️
img