गाँव के एक छोटे से घर में राधा अपनी इकलौती बेटी ज्योति के साथ रहती थी। ज्योति, जिसकी उम्र अभी मुश्किल से सात साल थी, अपनी माँ की आँखों का तारा थी। राधा एक सीधी-साधी, धार्मिक महिला थी, पर उसके इसी भोलेपन और अटूट विश्वास ने उसे अंधविश्वास के गहरे दलदल में धकेल दिया।
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