मै आजाद हूं

त्याग, बलिदान और गर्व से भरी ये कविता आज़ादी के हर रंग को महसूस कराती है, जहां तिरंगे की लहरों में वतन का सपना और वीरों की गूंज बसती है।

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दैनिक प्रतियोगिता

लेखक : विजय सांगा
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