जहाँ भगत सिंह की गूंज है लहू में, जहाँ सुभाष की हुंकार है अदम्य स्वरूप में, जहाँ बापू की अहिंसा है हथियार बनी, वहीं जन्म लेकर मैं खुद पर गर्व करता हूँ कहीं।
1. मैं आज़ाद हूँ 21 | 19 | 21 | 5 | | 15-08-2025 |
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