कुछ कहानियाँ शब्दों में नहीं, सांसों के बीच के ठहराव में लिखी जाती हैं। यह किताब उन्हीं ठहरावों, उन्हीं अनकही सच्चाइयों की डायरी है — एक स्त्री की, जिसने दुनिया के लिए स्वयं को मौन तो कर लिया, किन्तु भीतर अब भी कहानियाँ जल रही हैं। हर कविता एक पन्ना है — कभी राख के नीचे बची हल्की सी आँच, कभी एक प्रश्नन जो स्वयं से भी छुपा है, "चुप्पियों की डायरी" उन समस्त स्त्रियों की किताब है जो बाहर से मुस्कुराती हैं, और भीतर अपने ही निजान्त से बातें करती हैं।
© Copyright 2023 All Rights Reserved