कारवां

यह कविता "कारवां" ज़िंदगी के सफ़र, बिछड़ने और मिलने की कहानियों को बयां करती है—जहां रास्ते बदलते हैं, लेकिन यादें और एहसास कारवां की तरह चलते रहते हैं।

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दैनिक प्रतियोगिता

लेखक : विजय सांगा
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