बचपन का आंगन

"बचपन का आंगन" कविता उस मासूम दौर की यादें ताज़ा करती है, जहां हर कोना कहानी कहता था। यह कविता दिल को छूती है, जब हम अपने पुराने निशानों को फिर से जीने लगते हैं।

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: विजय सांगा
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