"शिकवा "

"शिकवा "..........शिकवा नहीं किसी से किसी से गिला नहीं नसीब में नहीं था जो हमको मिला नहीं नसीब में नहीं ... तू मिल सका न हमको तसल्ली तो मिल गई आई बहार शाख पे कली भी खिल गई अरमां था हमको जिसका वो गुल खिला नहीं नसीब में नहीं ... यादों की झिलमिलाती परछाइयों के दिन कटते नहीं हैं तन्हा तन्हाइयों के दिन है चाहतों का दिलकश अब सिलसिला नहीं नसीब में नहीं ...

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: Shivam Bhatt "साहित्य"
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