मेरी पे हां हूं मैं

यह आत्मसम्मान और आत्मस्वीकृति पर आधारित एक प्रेरणात्मक कविता है। ये कविता बताती है कि अपनी सच्चाई को अपनाना ही सबसे बड़ी पहचान है।

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: विजय सांगा
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