हर खजाना वरदान नहीं होता… कुछ खज़ाने केवल श्राप लेकर आते हैं — और कुछ… रक्षक की तलवार।" भारत के महाराष्ट्र में बसी "सप्तशृंग" नामक एक रहस्यमयी घाटी, जहाँ सात पहाड़ियों के नीचे दबी है एक गुप्त सुरंग, और उस सुरंग में छिपा है — हिरण्यगर्भ। एक प्राचीन कोष, जिसके लिए कभी एक राजा ने ऋषियों की समाधियाँ तोड़ी थीं, और बदले में देवताओं का कोप पाया था। तीन सौ साल बाद, उस खजाने की गूंज फिर से सुनाई देती है… जब पुरातत्वविद अर्जुन साठे अपने पैतृक गाँव लौटता है — और पाता है कि उसका अतीत, उसका परिवार और उसकी आत्मा… सब कुछ उसी खजाने से बंधा है। लेकिन यह सिर्फ एक खजाना नहीं… यह एक "परीक्षा" है — आत्मा की, लालच की, और अंततः… मोक्ष की।
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