चाँद… रात का सबसे शांत प्रहरी, जो हर रात बिना कुछ कहे सब कुछ कह जाता है। उसकी चुप्पी में एक गूंज है – अधूरे प्रेम की, छिपे हुए आंसुओं की, या किसी लंबे इंतज़ार की। यह कविता चाँद की उसी चुप्पी को एक आवाज़ देती है – इंसानी संवेदनाओं के आईने में।
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