सपनों का घर

खरीदा था मैंने एक घर, दिया स्वरूप उसे अपने सपनों का घर जैसा, जहाँ प्यार और खुशी का बसेरा है। दीवारें रंगीन, खिड़कियाँ चमकदार, हर कोने में खुशियों का इज़हार। यह घर मेरे सपनों का था आकार जहाँ हर पल मुझे मिलता प्यार का एहसास । टूटा इस कदर मेरा सपना, टूट गए मेरे सपने, जल गया मेरा यह घर। क्या कसूर था मेरा जो तुम मुझसे मिले। तबाह हो गई मेरी जिंदगी तबाह हो गया मेरा ये सपनो का घर।

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: Jyoti kumari
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