तेरे नाम की खुशबू

"तेरे नाम की ख़ुशबू" एक नाज़ुक सी कविता है, जो जुदाई में भी मौजूद मोहब्बत की महक को महसूस कराती है। ये कविता उन लम्हों की बात करती है, जब कोई दूर होकर भी दिल के बहुत करीब होता है। हर पंक्ति में बसी है वो ख़ुशबू, जो यादों से नहीं, रूह से आती है।

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लेखक : विजय सांगा
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