अपने - पराये

यह एक संवेदनशील कविता है, जो रिश्तों की सच्चाई, बदलते व्यवहार और आत्मिक अकेलेपन को गहराई से उजागर करती है। यह कविता दर्शाती है कि समय और हालात के साथ अपने भी कैसे पराये हो जाते हैं, और कभी अनजान से लोग दिल के सबसे करीब आ जाते हैं। सादगी से लिखी गई यह कविता, हर उस दिल की आवाज़ है जिसने अपनों से दूर होते रिश्तों को महसूस किया है।

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दैनिक प्रतियोगिता

: विजय सांगा
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