मायका

"मायका" एक दिल को छू लेने वाली कविता है जो एक बेटी के भावनात्मक जुड़ाव, उसकी मासूम यादों और उस घर की खुशबू को बयाँ करती है जहाँ उसने ज़िंदगी के सबसे बेफिक्र पल जिए। यह कविता उस संघर्ष को दर्शाती है जो एक बेटी शादी के बाद करती है—जब वह एक नए घर की ज़िम्मेदारियाँ निभाते हुए भी अपने मायके की दहलीज़ पर खुद को अब भी वही छोटी बच्ची महसूस करती है।

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: विजय सांगा
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