मर्यादा

मर्यादा केवल एक शब्द नहीं, एक स्त्री की चुप संघर्षभरी ज़िंदगी की वो सीमाएँ हैं, जिनके भीतर उसका समर्पण दबा पड़ा है। यह कहानी है उस मौन विद्रोह की, जो सम्मान और त्याग की परछाईं में पला-बढ़ा।

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दैनिक प्रतियोगिता

: विजय सांगा
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