प्रिय सूर्यास्त

ये कविता सूर्यास्त के बहाने आत्मचिंतन और भावनात्मक पुनर्जन्म की यात्रा को दर्शाती है। हर पंक्ति में एक स्त्री की भीतर की टूटन, स्वीकार्यता और फिर से उठ खड़े होने की शक्ति झलकती है।

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कविता

: तृप्ति सिंह
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