सूर्यास्त

यह कविता "सूर्यास्त" दिन के अंत में छुपे सुकून, उम्मीद और भावनाओं को बयां करती है। हर ढलती किरण के साथ यह हमें सिखाती है कि अंत भी एक नई शुरुआत का वादा होता है। यह कविता उन पलों को समर्पित है जब मन चुपचाप आसमान को निहारता है और खुद से बातें करता है।

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दैनिक प्रतियोगिता

: विजय सांगा
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