न जाने किन उलझनों में फंसी हुई हूं , सुलझाने की कोशिश में और उलझ रही हूं .. ये अरमानों को समेटने के चाह में , में धीरे धीरे और बिखर रही हूं..
1. बिखरते अरमान 25 | 18 | 23 | 5 | | 04-06-2025 |
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