कर्ण : मेरी उलझी ज़िन्दगी

कर्ण की ज़िन्दगी उलझनों से भरी रही — जहाँ उसे न तो जन्म की पहचान मिली, न समाज की स्वीकार्यता। उसकी बहादुरी और त्याग के बावजूद, वह हमेशा एक ऐसा इंसान बना रहा जिसे लोग समझ न सके। यह कविता उसी दर्द और संघर्ष की आवाज़ है, जो हर उस शख्स की कहानी है जिसे दुनिया ने कभी पूरा नहीं जाना।

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