क्षण भर का वह आवेग घना, सालों का रिश्ता तोड़े बिना सना। ना समझे यह मन की बात, क्रोध दे जाता गहरी घात।
1. क्रोध 19 | 15 | 19 | 5 | | 30-05-2025 |
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