क्रोध – न वह दुश्मन है, न मित्र, बस एक अग्नि की लपट है। जो संभाले, तो ऊर्जा बन जाए, जो बिखरे, तो सर्वनाश करे।
1. क्रोध 22 | 17 | 21 | 5 | | 30-05-2025 |
© Copyright 2023 All Rights Reserved