बचपन का स्कूल

यह कविता बचपन के स्कूल जीवन की मीठी और मासूम यादों को दर्शाती है। इसमें उस समय का चित्रण किया गया है जब बच्चा माँ की उंगली थामे स्कूल जाता है, नन्हे कदमों से अक्षर सीखता है और ब्लैकबोर्ड, चॉक, टिफ़िन, दोस्ती, टीचर की डाँट, खेल-कूद, परीक्षा, और छुट्टी की ख़ुशी जैसे हर पल में ख़ासियत होती है। कविता में बताया गया है कि कैसे उस दौर में जीवन सरल और सच्चा था, जहाँ सच्ची दोस्ती, मासूम सपने और दिल को छू लेने वाले लम्हे थे। अंत में, यह एक भावनात्मक इच्छा जताती है कि काश फिर से उस बचपन के स्कूल में लौटने का अवसर मिल जाए, जहाँ हर दिन नया और खूबसूरत होता था।

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