यह कविता रात की खामोशी के माध्यम से इंसान के भीतर चल रहे गहरे भावों और यादों को दर्शाती है। जब सारी दुनिया सो जाती है, तब खामोश रातें दिल की अनकही बातें सुनती हैं। रात का सन्नाटा इंसान के अंदर छुपे जज़्बातों, टूटे हुए ख्वाबों और अधूरी ख्वाहिशों को बाहर लाने का जरिया बनता है। कविता में चाँद, तारे, परछाइयाँ, पुरानी चिट्ठियाँ और वीरान कोनों के ज़िक्र के ज़रिए यह बताया गया है कि रातें केवल अंधेरा नहीं लातीं, बल्कि वे सुकून, आत्ममंथन और भावनाओं की परतों को खोलने का समय होती हैं। अंत में, भले ही सुबह सब कुछ ढक ले, लेकिन रात की खामोशी में छुपे सच हमेशा जीवित रहते हैं।
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