मेरी डायरी

यह कविता हमारी डायरी और उससे जुड़े जज़्बातों को खूबसूरती से बयान करती है। हर पन्ना हमारी यादों, सपनों और उलझनों का साथी बन जाता है, बिना कोई सवाल किए, बिना कोई शर्त रखे। कविता में डायरी को न सिर्फ एक किताब, बल्कि एक सच्चे दोस्त और आत्मा के आईने की तरह दिखाया गया है, जो सुकून और इशारे दोनों देती है।

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दैनिक प्रतियोगिता

: विजय सांगा
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