यह कहानी दिल्ली के एक मध्यमवर्गीय परिवार की है, जहाँ दादा जी और उनकी पोती आरोही के बीच पीढ़ीगत सोच का टकराव होता है। दादा जी अनुशासनप्रिय, परंपरागत सोच वाले हैं, जबकि आरोही आधुनिक विचारों वाली कॉलेज छात्रा है। दादा जी को लगता है कि नई पीढ़ी बुज़ुर्गों का सम्मान नहीं करती, जबकि आरोही खुद को हमेशा उनके द्वारा जज किया हुआ महसूस करती है। एक दिन कॉलेज में "Generation Gap" पर स्पीच देते हुए आरोही दादा जी की तारीफ करती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह उन्हें बहुत मानती है। यह जानकर दादा जी भावुक हो जाते हैं और दोनों एक-दूसरे को समझने का प्रयास करते हैं। अंततः दोनों के बीच रिश्ते में संवाद और समझ की एक नई शुरुआत होती है। मुख्य संदेश: पीढ़ियों के बीच मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन संवाद और आपसी समझ से उन्हें दूर किया जा सकता है।
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