गुमनाम

यह कविता एक ऐसे व्यक्ति की कहानी बयां करती है जो भीड़ में होते हुए भी अनजान है। उसकी पहचान किसी को नहीं, पर उसका दर्द और संघर्ष गहराई से छिपा हुआ है। वह हर दिन नई उम्मीद लेकर जीता है, मगर कोई उसकी ओर ध्यान नहीं देता। उसकी उपस्थिति किताबों, तस्वीरों और यादों में कहीं खोई हुई है। भले ही उसका कोई नाम या पहचान नहीं है, फिर भी वह हर किसी के जीवन में किसी न किसी रूप में मौजूद है। कविता बताती है कि गुमनाम होना मतलब खो जाना नहीं, बल्कि ख़ामोशी से दुनिया को छू जाना है।

15 Views
Time : 1 Min

All Right Reserved
कविता

: Wishcard Sangeeta
img