हार नहीं मानूंगी

समाज के तानों ने रोका कई बार, पर मैंने जलाया अपने भीतर का दीया हर बार। जो कहा 'तू लड़की है, रुक जा यहीं', मैं बोली — 'मैं उड़ान हूँ, रुकती नहीं'।

18 Views
Time : 1 Min

All Right Reserved
दैनिक प्रतियोगिता

: Erica
img