समाज के तानों ने रोका कई बार, पर मैंने जलाया अपने भीतर का दीया हर बार। जो कहा 'तू लड़की है, रुक जा यहीं', मैं बोली — 'मैं उड़ान हूँ, रुकती नहीं'।
1. हार नहीं मानूंगी 18 | 17 | 17 | 5 | | 12-05-2025 |
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