कितना कुछ कहना है तुमसे , पर अब वो एहसास नहीं, तेरे कंधे पर सर रखे जमाना हुआ , अब वो सुकून की तलाश नहीं , कभी तेरा साथ अच्छा लगता है , दिल खोलकर जीना चाहता था , तुमसे मिलकर खिल उठती थी मैं , अब तुम्हे देखकर ही दिल को तसल्ली देती हूं ,
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