वो मां थी

वो बोझ नहीं थी , बस अपनाई नहीं गई थी , अपनों की ठोकरें खाकर , घर से निकाली गई थी , उसे न गुस्सा आता था, न प्यार , न ही किसी से नफरत थी ,

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कविता

: Mahima
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