सौदा बेटी का

जब एक पिता ने अपनी बेटी के सपनों का सौदा कर दिया, तब वह बेटी टूटी नहीं, बल्कि खुद को फिर से गढ़कर खड़ी हुई। यह कहानी है आत्मबल, सामाजिक विडंबनाओं और एक स्त्री के अपने अस्तित्व की तलाश की।

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: विजय सांगा
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