कभी उग्र बनती धारा मेरी, कभी शांत-सी संजीवनी तेरी। धरती को मैं हरियाली देती, सूखे मन में नमी भर देती।
1. मैं नदी हूं 23 | 17 | 23 | 5 | | 07-05-2025 |
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