पाखंडी

“पाखंडी” एक ग्रामीण समाज की आंखें खोलती कहानी है, जिसमें आस्था और अंधविश्वास की पतली रेखा को बारीकी से उजागर किया गया है। यह कथा दिखाती है कि किस तरह एक ढोंगी बाबा, भोले लोगों की धार्मिक भावनाओं का शोषण करता है, और कैसे एक जागरूक युवक—राजू—सच की मशाल लेकर पूरे गांव को अंधकार से बाहर निकालता है। यह कहानी न केवल पाखंड के विरुद्ध एक प्रखर प्रतिरोध है, बल्कि विवेक, तर्क और सामाजिक जागरूकता की एक प्रेरणास्पद मिसाल भी है।

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: विजय सांगा
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