सांझ

यह कविता "सांझ" दिन के उस शांत और सुंदर क्षण को दर्शाती है जब प्रकृति ठहर-सी जाती है। ढलती धूप, लौटते पंछी और घर की ओर लौटते लोग – सब मिलकर एक सजीव चित्र बनाते हैं। यह रचना पाठक को शांति, सुकून और आत्मिक ठहराव का एहसास कराती है।

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: विजय सांगा
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