बड़ी बेटी/बड़ा बेटा

बेटी बड़ी हुई, अब नाज़ है उस पर, हर खुशी में शामिल, हर दर्द में साथ हर। जो गुड़ियों का घर सजाया करती थी, अब असली ज़िंदगी में रंग भरती चली जाती है।

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कविता

: rani
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